Iran Stock Market Reopening: 80 दिनों के लंबे युद्ध के बाद खुल रहा है ईरान का शेयर बाजार, क्या निवेशकों में लौटेगा भरोसा?
अमेरिका और इजरायल के साथ हुए भीषण युद्ध (War) के कारण पिछले करीब 80 दिनों से बंद पड़ा ईरान का शेयर बाजार (Tehran Stock Exchange) इस हफ्ते आखिरकार दोबारा खुलने जा रहा है। हालांकि, लंबे समय तक बाजार बंद रहने और युद्ध के कारण देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को पहुंचे नुकसान के बाद, इस री-ओपनिंग को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। TodayNews247 की इस खास अंतरराष्ट्रीय बिजनेस रिपोर्ट में जानिए कि इस फैसले का ईरान की अर्थव्यवस्था और निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा।
28 फरवरी से लगा था ताला
ईरान का मुख्य शेयर बाजार सूचकांक TEDPIX साल 2026 की शुरुआत में 4.5 मिलियन (45 लाख) अंकों के रिकॉर्ड स्तर पर था। लेकिन देश में आंतरिक अशांति, विरोध प्रदर्शन और फिर 28 फरवरी को अमेरिका व इजरायल द्वारा किए गए मिसाइल हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से बाजार को पूरी तरह बंद कर दिया गया था। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज ऑर्गनाइजेशन (SEO) के मुताबिक, बाजार को बंद रखने का उद्देश्य निवेशकों की संपत्ति को पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिकवाली) से बचाना था।
बाजार खुलने पर क्या होंगी नई व्यवस्थाएं?
इस हफ्ते मंगलवार और बुधवार से शेयर, इक्विटी फंड और डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग दोबारा शुरू की जाएगी।
- अतिरिक्त समय: कंपनियों को युद्ध से हुए नुकसान की जानकारी (Disclosures) साझा करने के लिए ट्रेडिंग के समय को 1 घंटा बढ़ाया गया है।
- Fluctuation Limit: बाजार में अचानक बड़ी गिरावट को रोकने के लिए शेयरों के उतार-चढ़ाव (Circuit Limit) को 3% पर सीमित रखा गया है।
- गोपनीयता नियम: सुरक्षा कारणों और आगे के सैन्य जोखिमों को देखते हुए, कुछ कंपनियों को अपने उत्पादन और डिजाइनों को “कमर्शियल सीक्रेट” रखने की अनुमति दी गई है।
कंपनियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया
SEO के चेयरमैन हुजातुल्लाह सैय्यदी के अनुसार, बाजार खुलने पर कंपनियों को नुकसान के आधार पर 3 कैटेगरी में देखा जाएगा:
- सीधा नुकसान झेलने वाली कंपनियां: पेट्रोकेमिकल्स और स्टील उत्पादक, जिन पर सीधे हमले हुए।
- अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित: वे कंपनियां जिनके सप्लायर्स या ग्राहक युद्ध से प्रभावित हुए।
- सामान्य माहौल से प्रभावित: वे कंपनियां जो देश के ओवरऑल इकोनॉमिक क्राइसिस से जूझ रही हैं।
निवेशकों में डर का माहौल, पैनिक सेलिंग का खतरा
ग्लोबल एक्सपर्ट्स और कंसल्टिंग फर्म्स का मानना है कि बाजार खुलते ही निवेशकों के बीच घबराहट में अपने शेयर बेचने (Panic Selling) की होड़ मच सकती है। ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों (Sanctions) और भारी महंगाई से जूझ रही है। ऐसे में लोग अपनी पूंजी को बचाने के लिए शेयर बाजार के बजाय विदेशी मुद्रा (डॉलर), सोना (Gold), और क्रिप्टोकरेंसी जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
